उत्तर पूर्वी दिल्ली:  ‘जीते चाहे कोई भी, जीतेगा पूर्वांचली ही’

उत्तर पूर्वी दिल्ली: ‘जीते चाहे कोई भी, जीतेगा पूर्वांचली ही’

मनोज तिवारी और कन्हैया कुमार की लोकप्रियता की वज़ह से उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट में देशभर के लोगों की दिलचस्पी

पहले चरण में 101 सीटों पर मतदान के बाद चुनावी विशेषज्ञों के बीच एक आम राय बनती दिख रही है कि 2024 लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी या नेता की ‘लहर’ नहीं है। पिछले दो लोकसभा चुनावों की तुलना में मतदान प्रतिशत में कमी इशारा कर रही है कि मुकाबला किसी भी गठबंधन के लिए आसान होने वाला नहीं है।

एक ओर जहाँ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (NDA) आत्मविश्वास के साथ ‘अबकी बार, चार सौ पार’ के नारे उछाल रहा है, वहीं इण्डियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायन्स (INDIA) भी अपने हर दाँव सावधानी से चल रहा है। इसी क्रम में इंडिया अलायन्स ने उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान सांसद मनोज तिवारी के ख़िलाफ़ कन्हैया कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। हालाँकि यहाँ चुनाव छठे चरण (25 मई) में होने हैं, लेकिन मनोज तिवारी और कन्हैया कुमार की लोकप्रियता की वज़ह से उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट में देशभर के लोगों की दिलचस्पी देखने को मिल रही है।


भोजपुरी गायक, कलाकार और भाजपा नेता मनोज तिवारी बीते 10 वर्षों से उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में मनोज तिवारी ने कद्दावर कांग्रेस नेत्री और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को रिकॉर्ड मतों से हराया था। चूंकि इस बार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) इंडिया गठबंधन के अंतर्गत चुनाव लड़ रही है, ऐसे में भाजपा के लिए चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। फिलहाल उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट में 10 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से सात पर आम आदमी पार्टी के विधायक हैं।


भाजपा के पक्ष में आंकड़ें

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज तिवारी ने आप के प्रो. आनंद कुमार को 1,44,084 वोटों से मात दी थी। मनोज तिवारी को 5,96,125 (45.2 फ़ीसद) वोट पड़े थे। वहीं, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार प्रो. आनंद कुमार को 4,52,041 (34.4 फ़ीसद) एवं कांग्रेस के सांसद जय प्रकाश अग्रवाल को 2,14,792 (16.3 फ़ीसद) वोट पड़े थे।

ग़ौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली का यह लोकसभा सीट वर्ष 2008 में अस्तित्व में आया था, जिसके बाद यहां पर अबतक कुल तीन बार लोकसभा चुनाव हुए हैं — वर्ष 2009, 2014 और 2019 में; जिसमें कांग्रेस ने एक और भाजपा ने दो बार जीत दर्ज की है।


दिलीप पांडे द्वारा 2019 लोकसभा चुनाव में किये गए रोड शो की तस्वीर •

2019 के लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने 7,87,799 (53.9 फ़ीसद) वोट प्राप्त कर क़रीब चार लाख मतों से कांग्रेस प्रत्याशी दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया था। शीला दीक्षित को कुल 4,21,697 (28.9 फ़ीसद) वोट और आप उम्मीदवार दिलीप पांडे को 1,90,856 वोट प्राप्त हुए थे।

वहीं, उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट के पहले लोकसभा चुनाव (2009) में कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश अग्रवाल को रिकॉर्ड 5,18,191 (59.03 फ़ीसद) वोट मिले थे। जय प्रकाश ने भाजपा प्रत्याशी बैकुंठ लाल शर्मा को 2,95,948 मतों से हराया था। जबकि तीसरे स्थान पर बसपा प्रत्याशी हाजी दिलशाद अली थे, जिन्हें महज़ 44,111 वोट मिले थे। इस लोकसभा सीट पर पिछले तीनों चुनाव में बसपा ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया था, लेकिन कभी भी बसपा प्रत्याशी 50 हज़ार के आंकड़े को छू नहीं पाए।


मनोज तिवारी, उत्तर पूर्वी जिला, दिल्ली प्रदेश की बैठक को संबोधित करते हुए एवं कन्हैया कुमार, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रेस वार्ता में शामिल •

‘जीतेगा तो पूर्वांचली ही’

उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में तक़रीबन 30 फ़ीसद मतदाता पूर्वांचल (पूर्वी यूपी और बिहार) से ताल्लुक रखते हैं। उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे हैं जो कभी काम व पढ़ाई के लिए दिल्ली आए और दिल्ली के होकर रह गए। ये लोकसभा क्षेत्र बहुत सारी मज़दूर बस्तियों और दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने आए विस्थापित छात्रों की रिहाइश है। यही कारण है कि ‘एडनीए’ और ‘इंडिया’ दोनों ने ही यहाँ से पूर्वांचली उम्मीदवारों को टिकट दिया है। जहाँ बीजेपी नेता मनोज तिवारी बिहार के कैमूर और पूर्वी यूपी के बनारस से, वहीं कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय से ताल्लुक रखते हैं।

पिछले 25 वर्षों से बुरारी में रह रहे शादाब ने मोजो स्टोरी को बताया, “पूर्वांचल से हैं ज़रूर मनोज तिवारी, लेकिन अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं आते हैं। यहाँ सड़क और सफ़ाई मूल समस्या है; बीते कई वर्षों से सड़कें इस कदर बदहाल हैं कि 500 मीटर की दूरी तय करने में घंटा भर वक़्त लग जाता है। इन मुद्दों पर जो बात करेगा, उसे जाएगा हमारा वोट। हमारे वोट देने का पैमाना सिर्फ़ पूर्वांचल से होना नहीं होगा, उन्हें मुद्दों पर बात करनी होगी।”

वहीं, क्षेत्र में ऐसे लोगों की भी कोई कमी नहीं जो इस बात से उत्साहित हैं कि उनका उम्मीदवार उनके गांव-ज्वार का है और सामान्य पृष्ठभूमि से उठकर आया है। बिहार के औरंगाबाद की माधुरी देवी, पति और दो बच्चों के साथ पिछले 18 वर्षों से किंग्सवे कैंप इलाके में लिट्टी-चोखा की रेहड़ी लगती हैं। वह कहती हैं, “मनोज तिवारी और कन्हैया कुमार दोनों ही अच्छे उम्मीदवार हैं। मनोज तिवारी ने गरीब ब्राह्मण परिवार से सांसद बनने का सफ़र तय किया है, जबकि कन्हैया कुमार भी गरीब घर के लड़के हैं। गरीब आदमी ही गरीब परिवार का दर्द समझ सकता है। मनोज तिवारी को हमने दो बार मौक़ा दिया, अब एक मौक़ा कन्हैया कुमार को भी दिया जा सकता है। दोनों ‘अपने’ ही हैं।”


प्रतीकात्मक इमेज • Unsplash

‘मुद्दों पर हों चुनाव’

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकडों (2024) के मुताबिक़, उत्तर पूर्वी लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाता की संख्या 23,81,442 है। 2011 की जनगणना के अनुसार, इस लोकसभा क्षेत्र में 29.34 फ़ीसद मुस्लिम आबादी है। उसके अलावा 16.3 फ़ीसद दलित और 21.75 फ़ीसद ओबीसी आबादी है।

मुसलमानों की बड़ी आबादी के बावजूद एनडीए या इंडिया गठबंधन; किसी ने भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया। जबकि, वर्ष 2009 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हाजी दिलशाद अली और 2014 में अब्दुल समी सलमानी को अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत ज़ब्त हो गई थी।

बातचीत के दौरान मोजो की टीम को लोगों ने बताया कि वे मुद्दा आधारित चुनाव चाहते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय समस्याओं को वरीयता दी जाए, न कि सांप्रदायिक मुद्दों पर डायवर्ट हो चुनाव। “महंगाई, यातायात, रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें पार्टियाँ - ये हैं हमारे मुद्दे। जो उम्मीदवार या पार्टी इन पर बात करेगी, वही हमारी प्राथमिकता होगी,” दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस क्षेत्र में ऑटो चलाने वाले विरेन्द्र पासवान ने कहा।

यूपीएससी के प्रतियोगियों को कोचिंग देने वाले शिक्षक आदित्य पांडेय कुछ दिनों पहले की एक घटना के हवाले से बताते हैं, “झड़ोदा (बुराड़ी) के पास स्थित शनि मंदिर के आसपास पिछले दिनों गौ हत्या की ख़बर फैली थी। हमें लगा कि एक बार फिर से माहौल ख़राब होगा, लेकिन लोगों ने अपने विवेक का इस्तेमाल किया और बहुत तेज़ी से फैल रही इस ख़बर पर विशेष ध्यान नहीं दिया।” दरअसल, गौ हत्या की यह अफ़वाह व्हाट्सएप वीडियो के ज़रिये फैली थी। प्रशासन की चौकसी की वज़ह से संभावित कोई भी अप्रिय घटना टल गई।

सीमापुरी विधानसभा क्षेत्र के सुंदर नगरी में रहने वाली दिपाली टोंक भी मानती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक उन्माद ने इलाके में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। “क्षेत्र में रहने वाले ज़्यादातर लोगों को काम करने इलाक़े से दूर जाना पड़ता है, जबकि ख़राब सड़क होने की वज़ह से बरसात के मौसम में बाहर की सड़कें धस जाती हैं; जिससे आवागमन प्रभावित होता है। वहीं, पानी की कटौती और बदबूदार पानी की समस्या से भी यहां के लोगों को निजात नहीं मिली है। हमारे लिए चुनाव के ये मुद्दे हैं,” दिपाली कहती हैं। वह बताती हैं कि धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रभाव यहां के 12-13 साल के बच्चों में भी देखा जा सकता है। बच्चे एक-दूसरे के साथ कुछ खाने-पीने और खेलने से बचते हैं।


प्रतीकात्मक इमेज • Unsplash

बीते दो चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में अंतर

स्थानीय लोगों का मानना है कि 2014 का चुनाव देश में बदलाव के लिए था। “मोदी की लहर थी और पहली बार उत्तर पूर्वी दिल्ली से किसी पूर्वांचली को टिकट दिया गया था। यह पूर्वांचली अस्मिता का चुनाव बन गया था।” ग़ौरतलब है कि वर्ष 2014 में मनोज तिवारी के पक्ष में गढ़वाल-त्यागी-शर्मा (ज़मींदारी वर्ग) समाज के लोगों ने एकतरफ़ा सहयोग किया था।

यूपीएससी शिक्षक आदित्य 2014, 2019 और 2024 के चुनाव के संदर्भ में बताते हैं, “2014 का चुनाव कांग्रेस को हटाने का चुनाव था। यूपीए के शासनकाल में घोटालों, अन्ना आंदोलन और जनलोकपाल आंदोलन ने भाजपा के पक्ष में हवा बना दी थी और ऊपर से मोदी लहर थी। उसके बाद 2019 के माहौल में कुछ ख़ास बदलाव नहीं था। लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को एक और मौक़ा दिया। लेकिन, 2019 में केजरीवाल का काम लोग देख चुके थे; उनका काम बोल रहा था। बावजूद उसके लोअर मीडिल क्लास के साथ-साथ आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग ने लोकसभा में मोदी और विधानसभा में केजरीवाल को वोट दिया। जबकि, 2024 का चुनाव बिल्कुल अलग है। इस बार चुनावी मैदान में ‘लहर’ जैसा कुछ दिख नहीं रहा है; बल्कि हर वर्ग का व्यक्ति तार्किक बहस में भाग ले रहा है। ख़ासकर, पहली बार वोट करने वाला मतदाता रोज़गार के मुद्दे को प्राथमिकता दे रहा है।”

“केजरीवाल की गिरफ़्तारी ‘इंडिया’ गठबंधन को फ़ायदा पहुँचा सकती है। माना जा रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए सहानुभूति वोट भी अहम भूमिका निभा सकती है, क्योंकि इस क्षेत्र में आम आदमी पार्टी को जनता का मज़बूत समर्थन है,” आदित्य ने जोड़ा।

सब्जी का ठेला लगाने वाले अजय बिष्ट ने मोजो को बताया, “मैंने 2014 में मोदी को ही वोट दिया था, फिर 2019 में भी लगा कि उन्हें एक मौक़ा और देना चाहिए। लेकिन, अब मुझे न ही मोदी पर भरोसा है और न ही टीवी पर। मोदी सरकार ने अग्निवीर स्कीम लाकर देश में सेना की तैयारी कर रहे सैकड़ों नौजवानों को अंधकार में धकेल दिया।”

क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियों में तेज़ी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा नेता मनोज तिवारी ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार कन्हैया कुमार पर तंज़ कसते हुए कहा, “जो लोग इस चुनाव में 40 दिन के दौरे पर आए हैं, वे हमारे क्षेत्र में हुए 14,600 करोड़ रुपये के काम ज़रूर देखेंगे। टुकड़े-टुकड़े गैंग का नेतृत्व करने वाले लोग, जो देश और सेना का सम्मान नहीं कर सकते; वे दिल्ली और दिल्ली के लोगों के प्रति कितने ज़िम्मेदार हो सकते हैं? वे देखेंगे कि कैसे क्षेत्र में मेट्रो, केंद्रीय विद्यालय, रेलवे स्टेशन, पासपोर्ट ऑफिस, सिग्नेचर ब्रिज जैसा पुल लाया जाता है।”

वहीं, कन्हैया कुमार का कहना है कि “हम पाँच न्याय के मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे। देश में जो अन्याय हो रहा है, उसके ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ेंगे और उसे समाप्त करेंगे। पार्टी ने हमें मौक़ा दिया है, हम उस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।”

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