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एम्स दिल्ली के छात्र की मौत के बाद ऑप्टोमेट्री स्टूडेंट यूनियन की हड़ताल जारी, प्रशासन अब भी मौन

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ऑप्टोमेट्री प्रथम वर्ष के एक छात्र की कोविड-19 और स्वाइन फ्लू के कारण हुई मौत को लेकर चल रही हड़ताल का दसवां दिन चल रहा है। जबकि क्रमिक भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। लेकिन एम्स प्रशासन अब भी मौन है।

 


By Shivam Rai, 27 Aug 2022


ऑप्टोमेट्री स्टूडेंट यूनियन ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने उसे एंबुलेंस मुहैया कराने से इनकार कर दिया और ईलाज में भी लापरवाही की जिस कारण से उसकी मौत हो गई।

ऑप्टोमेट्री स्टूडेंट यूनियन की एम्स प्रशासन से तीन प्रमुख मांग है, जिसे लेकर वह हड़ताल पर बैठे है।

  1. मृतक छात्र अभिषेक मालवीय के परिवार को मुआवजा मिले। क्योंकि यहां सीधे-सीधे प्रशासन की लापरवाही के कारण यह घटना घटी। अभिषेक अपने घर का बड़ा लड़का था और परिवार को उनसे बहुत उम्मीदें थी।
  2. पैरामेडिकल के सभी छात्र-छात्राओं को फौरन हॉस्टल मुहैया कराएं जाएं। और अब से दाखिला लेने वाले छात्रों को फर्स्ट डे से हॉस्टल सुविधा मिले। ताकि उन्हें स्वच्छ पानी, स्वच्छ वातावरण, आपात स्थिति में एंबुलेंस, लाइब्रेरी, योगा, जिम आदि मूलभूत अधिकार और जरूरी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
  3. एम्स प्रशासन द्वारा यूजी छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करें। सभी को एकसमान सुविधा मुहैया कराएं।

दिल्ली एम्स प्रशासन ने अभी तक ना तो कोई मांग माना ना ही कोई आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पहले छात्र हड़ताल खत्म करने के बाद ही बात करना संभव हो पाएगा। जबकि यूनियन का कहना है कि हॉस्टल की समस्या को लेकर बीते दो वर्षों से हॉस्टल सुप्रीडेंट से प्रार्थना कर रहें। लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो रही है। अभी हम तीन दिनों से भूखे हैं लेकिन कोई अधिकारी हालचाल पूछने नहीं आएं।

क्या है पूरा मामला

एम्स में पैरामेडिकल के 19 वर्षीय छात्र अभिषेक मालवीय की मौत 13 अगस्त को हो गई थी, उनका इलाज एम्स में ही चल रहा था, लेकिन डॉक्टर जान बचाने में सफल नहीं हो पाए। अभिषेक की मौत की वजह इंफ्लूएंजा, निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी में परेशानी और कोविड बताया गया।

 छात्रों ने बताया कि वर्ष 2020 के प्रॉस्पेक्टस से ही हॉस्टल सुविधा को हटा दिया गया है। जिसके बाद से एम्स प्रशासन द्वारा नए दाखिला ले रहे पैरामेडिकल के छात्रों को हॉस्टल नहीं दे रहा है। ऐसे में अन्य छात्रों की तरह अभिषेक मालवीय को एम्स से बाहर किराए पर रहना पड़ा, गरीबी की वजह से वह किराया चुका पाने में असमर्थ हो रहे थे, इसलिए अभिषेक अपने रसद खर्चे में कटौती की और वह पोषित आहार लेने सक्षम नहीं था जिसके कारण उसके शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हुआ।

अभिषेक की मौत के बाद पैरामेडिकल के स्टूडेंट्स इस मुद्दे पर डायरेक्टर ऑफिस का घेराव किए। प्रशासन का आरोप कि छात्र उस समय उग्र छात्रों ने ऑफिस के दरवाजे तोड़ दिए। जबकि यूनियन का कहना है कि जब हम वहां ऑफिस में अपनी बात रखने गए तो वहां मौजूद गार्ड ने हमें बाहर निकालने के लिए धक्का-मुक्की इसी दौरान दरवाजें के शीशे टूट गए। और अब प्रशासन हमारी बात सुनने के बजाय हम पर झूठा आरोप मढ़ रहा है।

 पैरामेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन ने कहा कि हॉस्टल की कमी की वजह से सारे स्टूडेंट्स परेशान हैं। हम भी प्रतियोगिता परीक्षा देकर यहां आए हैं। गरीब घर से हैं, लेकिन देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान में हमारे लिए हॉस्टल नहीं है। दुख की बात यह है कि पहले हमारे लिए हॉस्टल था, जो अब एमबीबीएस वालों को दे दिए गए हैं और हमें बाहर रहने को कहा जाता है। जहां पर भारी-भरकम खर्च होता है, जो कई छात्र वहन नहीं कर पाते।

किफायती दरों में उन्हें घर मिल सके इसलिए उन्हें एम्स से 14-15 किलोमीटर दूर घर खोजने के लिए मजबूर होते हैं और रोज इतनी दूर से का आना-जाना, ओपीडी में सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक ड्यूटी फिर दोपहर 2 बजे से लेकर सायं 5 बजे तक क्लास, फिर वॉर्ड में जाना होता है। इतने काम के बाद भी हमारे लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

अभिषेक भी यह परेशानी झेल रहे थे और अभी भी पैरामेडिकल के सभी छात्र यह परेशानी झेल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि किफायती दरों में घर लेने के लिए उन्हें स्वच्छ पानी, स्वच्छ वातावरण जैसे मूल बातों को भूलना पड़ता है। और दूर रहने के कारण न सिर्फ एंबुलेस बल्कि लाइब्रेरी, योगा, जिम जैसी सुविधाओं से भी वंचित रह जाते है।

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि छात्राओं को एम्स परिसर से बाहर रहने के कारण कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रा के दौरान रास्ते में छेड़खानी भी हो चुकी है। आए दिन अराजक तत्वों द्वारा उन पर फब्तियां कसी जाती है और यहां तक कि कई बार उनके मोबाइल और पर्स छीन लिए गए।

क्या है पूरा घटना क्रम

यूनियन ने बताया कि अभिषेक 19 वर्ष के थे, अभी बारहवीं पास करके ही आएं थे और एम्स से दूर किराए के घर में अकेले रहते थे। 9 अगस्त जब उनकी तबीयत खराब हुई थी। उन्होंने अपने साथी को कॉल किया क्लास में होने के कारण साथी फोन नहीं उठा सका। क्लास से फ्री होते ही साथियों ने वापस उसे कॉल किया उसने सांस लेने में तकलीफ बताई। उसके साथी उसके घर पर गए और हालत गंभीर देख उन्होंने एम्स में कॉल कर एंबुलेंस मांगा तो जवाब मिला कि ‘छात्रों को एंबुलेंस की सुविधा एम्स परिसर के बाहर नहीं मिल सकती।

निराशा हाथ लगने पर साथियों ने कैसे भी करके अभिषेक को बाइक पर लेकर अस्पताल में पहुंचे। पहले इमरजेंसी में भर्ती हुए और बाद में पल्मोनरी डिपार्टमेंट के अंदर इलाज शुरू हुआ। जिसमें उसे पहले 50- O2 पर फिर 100-O2 पर रखा गया।

डॉक्टर ने बताया कि उन्हें इंफ्लूएंजा हो गया है, निमोनिया है, एक्यूट रेस्पिरेटरी की परेशानी है और पहले तो कोविड नेगेटिव बाद में कोविड पॉजिटिव बताया।

ध्यान देने योग्य बात ये कि पहले एम्स प्रशासन अभिषेक की कोविड रिपोर्ट नेगेटिव बताई थी। और एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एम्स के आपातकालीन विभाग तक पहुंचने में दो से तीन घंटे लग गए, जहां उनकी स्थिति को ‘‘गंभीर’’ घोषित कर दिया गया।

यूनियन ने कहा कि अभिषेक अगर छात्रावास में रहे होते तो बच जाते उन्हें एंबुलेंस मिल पाता। हम सब उसके साथ होते तो उसके समस्याओं से अवगत होते। आखिर वो अभी परिपक्व नहीं था पहली बार घर से दूर था और वो भी अकेले।

एम्स प्रशासन ने मृत्यु के बाद भी मानवता नहीं दिखलाई 

छात्रों द्वारा लाख गुहार लगाने के बाद भी एम्स अधिकारों के चेहरे पर शिकन नहीं आई, ना ही उस मृतक छात्र के लिए संवेदना जगी। शव को वापस गृह जनपद प्रयागराज ले जाने के लिए भी एम्स प्रशासन ने एंबुलेंस मुहैया कराने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि “दिल्ली से बाहर के लिए एंबुलेंस नहीं दे सकते!” जिसके बाद पैरामेडिकल छात्रों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर शव को प्रयागराज भेजा।

यूनियन ने कहा कि यह मौत नहीं, एक तरह से मर्डर है। गंभीर मरीज के लिए एक-एक क्षण महत्वपूर्ण होता है।  अगर अभिषेक को एंबुलेंस मिल गया होता तो उसे समय रहते तात्कालिक स्वास्थ सुविधा मिल जाती जिसमें देरी हुई। लेकिन सवाल अब सिर्फ अभिषेक का नहीं है बल्कि सभी सभी पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं का है। अगर कल को किसी अन्य छात्र के साथ ऐसी दुखद स्थिति पैदा होती है तो प्रशासन का रवैया अगर इस तरह से रहा तो फिर किसी साथी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिए यूनियन हड़ताल पर हैं। इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिल रहा है और न ही डायरेक्टर ने स्टूडेंट्स से मिलना उचित समझ रहे है।