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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस बढ़ने पर छात्रों का आमरण अनशन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने 18 दिनों पहले वोकेशनल कोर्सेज़ को छोड़कर ट्रेडिशनल कोर्सेज़ की फीस चार सौ प्रतिशत बढ़ा दी. फीस वृद्धि के विरुद्ध इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रदर्शन आरंभ कर दिया. कुछ छात्र लगातार आमरण अनशन कर रहे हैं. इस दौरान छात्रों का दावा है कि विश्वविद्यालय की ओर से किसी प्रतिनिधि ने छात्रों से बातचीत नहीं की.


By Team Mojo, 24 Sep 2022


वर्तमान परिदृश्य में ट्रेडिशनल व नॉन ट्रेडिशनल कोर्सेज़ में शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों की संख्या 36 हज़ार है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ट्रेडिशनल कोर्सेज़ में बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी, एमकॉम, एलएलबी, एलएलएम जैसे कोर्सेज़ की लगभग 11,178 सीटों पर फीस में लगभग चार गुना की बढ़ोतरी हुई है. ये फीस 2022 सत्र में दाख़िला लेने वाले छात्रों पर मान्य होगी.

फीस वृद्धि की नोटिस आने के बाद, 15 दिनों से विश्वविद्यालय के प्रांगण में मौजूद ‘छात्र यूनियन’ की बिल्डिंग के कॉरिडोर में छात्र धरने पर बैठे हैं. इन छात्रों में से एक अमित कुमार पांडेय प्रयागराज ज़िला के मेज़ा तहसील के टिकापुर क़स्बा के रहने वाले है. उनके पिता किसान हैं. अजय पांडे ने इस वर्ष 2022 में स्नातक की पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एफलिएटेड सीपीएम कॉलेज से पूरी की. अमित कुमार इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी करना चाहते हैं.

“मैंने विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के लिए प्रवेश परीक्षा दिया, इसमें अच्छे नम्बर भी आए हैं. जब फीस वृद्धि की बात मैंने पिता जी को बताई, तो उन्होंने कहा कि घर चले आओ, मैं आगे नहीं पढ़ा सकूंगा,” अमित ने बताया।

दरअसल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ट्रेडिशनल कोर्सेज़ में दाख़िला लेने वाले लगभग 70 प्रतिशत छात्र गरीब किसान या मज़दूर परिवारों से संबंधित हैं. इस कारण अमित कुमार पांडे अकेले नहीं हैं जिन्हें फीस वृद्धि पर आपत्ति है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा हासिल करने वाले ये छात्र उत्तरप्रदेश के अलावा बिहार, बंगाल, मध्यप्रदेश, आदि राज्यों से आते हैं. जबकि उत्तरप्रदेश के छात्र राज्य के सभी ज़िलों से आते हैं. लेकिन पूर्वांचल से आकर विश्वविद्यालय में शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों की आर्थिक स्थिति कहीं अधिक दयनीय है.

दरअसल उत्तरप्रदेश के विभिन्‍न ज़िलों व बिहार से आकर शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों में अधिकांश छात्र ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं. जिनके अभिभावक या तो छोटे किसान हैं या फिर मज़दूरी करने वाले लोग हैं. आयुश रंजन इलाहाबद विश्वविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष वर्ष के छात्र हैं. उन्होंने बताया कि मुझे हॉस्टल नहीं मिला इस लिए मैंने चार हज़ार रुपए रेंट पर दो शेयरिंग रूम ले लिया. मैं खुद खाना बनाता हूं. महंगाई बहुत होने के कारण बड़ी मुश्किल से खाने का खर्च पूरा हो पाता है. पिता जी कारपेंटर हैं उनकी महीने की आय लगभग पंद्रह हज़ार रुपए है. इस आय से वह मुझे पांच हज़ार रुपए महीना देते हैं, लेकिन रकम बड़ी होने के कारण वह इसे एक बार में नहीं भेज पाते, इस लिए वह हर महीने ये रकम तीन किश्तों में भेजते हैं.

आयुश रंजन आगे कहते हैं कि “इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस कम होने के कारण मैंने बिहार के चमपारण से आ कर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाख़िला लिया. अगले वर्ष मैं एलएलबी करना चाहता हूं. फीस बढ़ गई है इस लिए मुझे कोई काम तलाशना होगा ताकि मैं आगे की पढ़ाई कर सकूं.”

फीस वृद्धि के विरोध में जारी प्रदर्शन का हिस्सा हरिकेश कुमार हैरी रायबरेली के चांदमऊ गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया है. इस दौरान अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए हैरी ने मज़दूरी की. हैरी के पिता भी मज़दूरी करते हैं. हैरी के गांव में मौजूद एससी समाज से वह एमए करने वाले पहले शख़्स हैं.

हैरी बताते हैं कि “एमए की परीक्षा के बाद अखबार बांटते हुए एलएलबी करने के लिए मैंने फीस जुटाई, इंट्रेंस हेतु फॉर्म भरा, रिज़ल्ट भी आ गया. लेकिन इस बीच फीस बढ़ोत्तरी की नोटिस आ गई. अब मैं एक मज़दूर का बेटा हूं, कहां से ये फीस जमा करूं. “अब मैं या तो काम कर के बढ़ी हुई फीस के लिए पैसे जुटाऊं या फिर एलएलबी करने का ख्याल त्याग दूं,” हरिकेश सिंह हैरी ने कहा.

आंचल सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एफ्लिएटेड ‘ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज’ में एमए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं. प्रतापगढ़ की रहने वाली आंचल भविष्य में पीएचडी करना चाहती हैं. फीस वृद्धि को लेकर वह कहती हैं कि चार गुना फीस वृद्धि का मसला सिर्फ यूनिवर्सिटी का नहीं. यूनिवर्सिटी से संबंधित सभी महाविद्यालयों का भी है. यूनिवर्सिटी में बीए की 975 रुपए थी जो अब 3901 रुपए फीस है वहीं यूनिवर्सिटी से एफलिएटेड महाविद्यालयों में दो हज़ार रुपए फीस है. अब यदि यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ेगी तो एफ्लिएटेड कॉलेजों की फीस चार गुना बढ़ कर आठ हज़ार रुपए हो जाएगी. इसी प्रकार दूसरे कोर्सेज़ की फीस एफ्लिएटेड कॉलेजों चार गुना बढ़ जाएगी. जैसे एमए की फीस बढ़कर चौंतीस हज़ार रुपए हो जाएगी, जो ग्रामीण आंचल से आने वाले छात्रों के साथ नाइंसाफी होगी.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीए थर्ड इयर की छात्रा रीना यादव का कहना है मेरे घर वाले लड़कियों को गांव से दूर पढ़ने के लिए कई कारणों से नहीं भेजना चाहते. अब फीस वृद्धि होने के बाद लड़कियों को घर वाले आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने के कारण यहां पढ़ने के लिए नहीं भेजना चाहेंगे. उन्होंने आगे कहा कि “आप मेरा उदाहरण ले सकते हैं, मेरे पापा नहीं हैं, भैया खुद पीएचडी कर रहे हैं और मुझे भी पढ़ा रहे हैं. अगले वर्ष मुझे एमए करना है, लेकिन फीस बढ़ने के बाद, हो सकता है मुझे गांव वापस जाना पड़े.”

आपने स्कॉलरशिप क्यों नहीं ली? इस सवाल के जवाब में रीना यादव ने कहा कि मैंने प्रथम व द्वितीय वर्ष में फॉर्म भरा था, लेकिन दोनो वर्षों में स्कॉलरशिप नहीं आई, इस लिए तृतीय वर्ष में मैंने फॉर्म नहीं भरा.

बीए द्वितीय वर्ष के छात्र शिवम शर्मा लेक्चरर बनना चाहते हैं. लेकिन फीस वृद्धि के बाद भविष्य की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं. उनके पिता किसान हैं, उनकी वार्षिक आय लगभग पचीस हज़ार है. वह कहते हैं कि मुझे समझ में नहीं आता कि वह कहां से कर्ज़ लेकर मुझे पढ़ा रहे हैं.”

शिवम का कहना है कि मसला सिर्फ फीस वृद्धि का नहीं है, दरअसल यहां पेन, कॉपी, साबुन, मेस का खाना हॉस्टल की फीस आदि भी खर्च का बड़ा हिस्सा है. इस खर्च को वहन करना मेरे लिए बहुत मुश्किल है. अब यहां फीस बढ़ गई है जो एमए के समय मेरे लिए कष्टदायक होगी.

शिवम शर्मा आगे कहते हैं कि “जिस तरह फीस की वृद्धि चार गुना हूई उसी प्रकार हमारे खेत का गेहूं भी चार गुना कीमत पर बिके तो हम फीस देने को तैयार हैं.”

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी कतने की हसरत लिए अमित कुमार पांडेय फीस वृद्धि के बाद पिछले एक हफ्ते से अधिक दिनों से आमरण अनशन पर रहे. शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद साथी छात्रों ने उनको अस्पताल में भर्ती करवा दिया. MOJO से बातचीत में अमित कुमार ने धीमी आवाज़ में कहा, “मैं पिछले आठ दिनों से आमरण अनशन पर हूं. इस दौरान मेरे मेडिकल चेकअप के लिए कोई नहीं आया. मुझे लगता है कि मेरे कुछ बॉडी पार्ट्स खराब हो गए हैं.”

आपने आमरण अनशन क्यों किया? इस सवाल पर जवाब देते हुए अमित ने कहा कि मैं और मेरे कई साथियों ने विश्वविद्यालय को कई बार ज्ञापन दिया. नैं यूजीसी कार्यालय गया, जंतरमंतर पर गया, शिक्षा मंत्री के सामने प्रोटेस्ट किया. जब कोई विकल्प नहीं दिखा तब मुझे आमरण अनशन पर वैठना पड़ा.

अमित ने आगे कहा कि “अब दो में से एक ही बात होगी, या तो फीस वृद्धि होगी या फिर मैं अपने प्राण का त्याग करूंगा.”

कुछ छात्रों ने फीस वृद्धि के साइड इफेक्ट को दूसरे एंगेल से जोड़ते हुए कहा कि ‘फीस वृद्धि का बुरा असर महिलाओं की उच्च शिक्षा पर पड़ेगा. अंकित कुमार, छात्र, बीएससी पार्ट थ्री, का मानना है कि महिला का एजुकेशन पुरुषों की तुलना में सेकेंडरी माना जाता है. अत: फीस वृद्धि के बाद दो भाई बहनों के परिवार में, बहन को घर पर रोक लिया जाए और सिर्फ उसके भाई को पढ़ाई करने की इजाज़त दी जाए.”

इस ट्वीट में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के द्वारा ली जाने वाली फीस की तुलना की गई है. जिसके अनुसार, इलाहाबद विश्वविद्यालय में पढ़ रहे वर्तमान पैंतीस हज़ार छात्र बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी, एमकॉम, एलएलबी, एलएलएम, पीएचडी कोर्सेज़ के लिए 975, 1125, 975, 1561,1861, 1561,1275, 1561,501 रुपए अदा कर रहे हैं. फीस वृद्धि के बाद छात्र बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी, एमकॉम, एलएलबी, एलएलएम, पीएचडी कोर्सेज़ के लिए 3901, 4151, 3901, 4901, 5401, 4901, 4651, 4901, 15300 से 15800 रुपए अदा करेंगे. यदि इस फीस की तुलना ‘बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी’ की जाए तो, ‘बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी’ में छात्र बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमएससी, एमकॉम, एलएलबी, एलएलएम, पीएचडी कोर्सेज़ के लिए 3420, 4400, 3420, 4620, 6720, 4620, 3850, 4870, 7640 रुपए फीस जे तौर पर अदा करते हैं. इस तुलना के अनुसार दोनो विश्वविद्यालय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की फीस अधिकांश पाठ्यक्रमों में ‘बनारस हिंदू विश्वविद्यालय’ की तुलना में अधिक है.

फीस वृद्धि पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने क्या कहा?

फीस वृद्धि को जस्टिफाई करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वीसी प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने बीए की फीस का उदाहरण देते हुए explain किया, “The fee per student per tear for past several decads was ₹975/-, If you divide this in 12 months it comes to ₹81/- per month. Now AF fee has been enhanced to ₹4151/- per year. after dividing it woth 12 months it comes to 333/- per month.”

She further said that “what is being spread is that there is 400 times increase which is not correct. The 30 to 40 students who have chosen to disrupt the campus by falsehood are trying to ruin academic environment of Allahabad university.”

लेकिन इलाहाबाद से एलएलएम कर चुके छात्र अजय यादव सम्राट का मानना है कि हॉस्टल की फीस में वृद्धि हो चुकी है, जो 15 हज़ार रुपए के आसपास है. जबकि मेस का चार्ज लगभग ढाई से तीन हज़ार रुपए प्रति महीने है. उन्होंने कहा कि आज ट्रेडिश्नल कोर्सेज़ की फीस बढ़ी कल वोकेश्नल कोर्सेज़ की फीस बढ़ेगी. ऐसे में हाशिये पर जा चुके किसानों के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय एक उम्मीद हुआ करती थी. अत: फीस वृद्धि वंचित वर्ग के छात्रों को शिक्षा से वंचित होने का संकेत देती है.

जबकि वीसी ने अपने संदेश में कहा कि The fee has been increased only to combat the inflation which has happened in past decades, that too because for unknown reasons it was not enhanced each year as per the rate of inflation in the country.”

कुछ छात्रों ने आत्मदाह करने का किया प्रयास

फीस वृद्धि के बाद प्रतिदिन छात्र विश्वविद्यालय के यूनियन गेट पर प्रदर्शन कर रहे हैं. एक छात्र ने सोमवार को आत्मदाह करने का प्रयास किया. तो मंगलवार को कई छात्रों ने वीसी कार्यालय के समक्ष सैकड़ों छात्रों की मौजूदगी में आत्मदाह करने का प्रयास किया. उस दौरान आधा दर्जन छात्रों ने अपने ऊपर केरोसीन और पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश की.

संतोष कुमार मीणा, सिटी एसपी प्रयागराज ने बताया कि “विश्वविद्यालय गार्ड्स के द्वारा जानकारी दी गई कि कोई छात्र ऊपर चढ़ गया. इसके बाद फोर्स आई और फायर ब्रगेड की गाड़ी भी आई. जिनके द्वारा छात्र को उतारा गया. उसके बाद केरोसिन छिड़काव करने वाले छात्रों को फायर की गाड़ी के द्वारा रोका गया, और छात्रों को बातचीत के द्वारा समझाया गया.

प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर हुई FIR

प्रोफेसर डॉ जया कपूर के अनुसार पिछले कुछ दिनों में अलग अलग संदर्भों में तीन एफआईआर कर्नलगंज थाना में दर्ज हूईं. पहला मामला ये है कि छात्रों ने विश्वविद्यालय का मेन गेट बंद कर दिया था, इस कारण कुछ छात्रों पर पहली एफआईआर हूई. दूसरी एफआईआर शुक्रवार को तब हूई जब छात्रों ने छात्रसंघ गेट का ताला तोड़ा. तीसरी एफआईआर छात्रों पर तब की गई जब छात्रों ने एक गधे को विश्वविद्यालय कैम्पस में लाने की कोशिश की, जो आपत्तिजनक था. ये सभी एफआईआर विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के द्वारा की गई.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ‘मध्यकालीन इतिहास व मॉडर्न इतिहास विभाग’ में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर ‘विक्रम हरिजन’ ने फीस वृद्धि पर कहा कि “इलाहाबाद की बात नहीं पूरे भारत में शिक्षा फ्री होनी चाहिए. ये अच्छी बात है कि फीस वृद्धि के विरुद्ध इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघर्ष कर रहे हैं. मैं उनका समर्थन करता हूं. द हिंदू अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार जिन देशों में शिक्षा फ्री है वह देश तरक्की कर रहे हैं. अत: मैं भारत सरकार एवं वीसी महोदया से अपील करता हूं कि छात्रों को मुफ्त शिक्षा दीजिए.”

प्रोफेसर विक्रम ने आगे कहा कि “इनइक्वलिटी को दूर करने के लिए हम संविधानिक नैतिकता पर चलें. दुख की बात है कि फीस वृद्धि संविधान के खिलाफ है.”

विश्वविद्यालय का इतिहास रोचक है 1866 में गवर्नर विलियम म्योर के नाम पर म्योर कॉलेज की स्थापना हुई. जो आगे चलकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ. 23 सितंबर 1887 को कलकत्ता, बंबई तथा मद्रास विश्वविद्यालयों के बाद म्योर कॉलेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उपाधि प्राप्त करते हुए भारत का चौथा विश्वविद्यालय बना. इस विश्वविद्यालय में दाखला के लिए प्रथम प्रवेश परीक्षा मार्च1889 में हुई। इस नामचीन विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों की लिस्ट में कई ऐसे छात्रों के नाम शामिल हैं, जिन्हें प्रसिद्ध हस्तियों के रूप में पहचान मिली. इन हस्तियों में विश्वनाथ प्रताप सिंह व चंद्रशेखर भारत को तो वहीं सूर्य बहादुर थापा नेपाल के प्रधानमंत्री बने. जबकि उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्‍लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा, नारायण दत्त तिवारी व दिल्‍ली के सीएम रहे मदन लाल खुराना, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके विजय बहुगुणा और मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे डॉ. अर्जुन सिंह ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. इस विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का एक दौर में अलग दबदबा था. जिस पर बनी फिल्म में इरफान व आशुतोष राणाने अहम भूमिका निभाई थी.