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तिरंगा न बांटने पर अधिकारी ने पत्र जारी कर कर्मचारियों के उपर देशद्रोह लगाने की दी धमकी

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सफाईकर्मी को ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने पर अजीबो गरीब सजा दी गई। तिरंगा यात्रा में अनुपस्थित रहने पर नगर पालिका अधिकारी ने सफाईकर्मी को देशद्रोह के तहत कार्रवाई तथा बर्खास्तगी हेतु कारण नोटिस जारी किया। इतना ही नहीं दो अन्य दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को तिरंगा बांटने में लापरवाही बरतने पर निलंबित करते हुए देशद्रोह के तहत कार्रवाई करने संबंधी नोटिस भेजा गया है।


By Anil Tiwari, 21 Aug 2022


मामला नरसिंहपुर जिले के साई खेड़ा नगर परिषद का है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने यहां विकास मेहतर नामक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया। विकास पर आरोप है कि उन्हें तिरंगा यात्रा में रथ लेकर शामिल होना था लेकिन उस दौरान वे अनुपस्थित थे और चाबी उनके पास होने के कारण रथ भी तिरंगा रैली में शामिल नहीं हो सका। नगर पालिका अधिकारी ने उन्हें नोटिस भेजकर कहा कि यह कृत्य देशद्रोह की भावना के अंतर्गत आता है। क्यों न आपके विरुद्ध राष्ट्रदोह धारा के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया जाए और आपकी सेवा समाप्त की जाए।  

नगर पालिका अधिकारी ने 8 अगस्त को नोटिस भेजकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को की सेवा समाप्त करने संबंध आदेश जारी कर दिया गया। 

इस मामले पर विकास ने कारण बताओ नोटिस का जवाब भी 10 अगस्त को दिया उसने जवाब में कहा कि मैं दिनांक 8 अगस्त  को तिरंगा रैली के लिए रथ लेकर तैयार था। उसी समय इसकी चाबी कहीं खो गई। जिसकी सूचना यथासमय मैंने कार्यालयीन कर्मचारियों को दे दी थी। चाबी काफी खोजने के बाद भी नहीं मिली इसके कारण परिषद को वाहन उपलब्ध नहीं हो सका जिसमें मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूँ।मै इस देश का जिम्मेदार नागरिक हूं मैनें आज तक कोई राष्ट्रद्रोह का कार्य नहीं किया है और न ही भविष्य में करुंगा, मेरे द्वारा भविष्य में ऐसी लापरवाही कभी नहीं होगी।

कलेक्टर नरसिंहपुर रोहित सिंह ने मोजोस्टोरी से बात करते हुए कहा कि जब यह मामला वरिष्ठ अधिकारी के पास पहुंचा तो विकास मेहतर को वापस  बहाल कर दिया गया।

इसी तरह का नोटिस 13 अगस्त को दो अन्य दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को दी गई। नगरपालिका अधिकारी ने अनुराग चौकसे और आशीष चौकसे को भी इसी तरह का नोटिस भेजा गया है।

इसमें लिखा है कि निकाय में अतिमहत्वपूर्ण हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत दोनों को वार्ड क्रमांक 1 से 3 तक तिरंगा वितरण करने की जिम्मेदारी दी गई थी। नगर पालिका अधिकारी के मुताबिक वे जब इन वार्डों में घूमने निकले तो घरों पर तिरंगा नहीं थे। उन्होंने नोटिस में लिखा कि आपके द्वारा जानबूझकर कार्यक्रम में रुचि नहीं ली जा रही है। क्यों ने आपके विरुद्ध देशद्रोह की धारा के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाए

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता अली जैदी ने कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि कानून का मखौल है । जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून पर रोक लगा दी है और ये अधिकारी कर्मचारियों को देशद्रोह का आरोप लगाकर बर्खास्त कर रहे हैं। इससे ज्यादा बेतुका क्या हो सकता है ? केवल कर्तव्य की उपेक्षा करना राष्ट्र के विरुद्ध कार्य नहीं हो सकता है, लेकिन आज के परिवेश में हम उस युग में रह रहे हैं जहाँ कानून की किताबों में लिखे प्रावधानों को तोड़ना अपराध हो भी सकता है और नहीं भी। लेकिन किसी विशेष विचारधारा का पालन नहीं करना निश्चित रूप से अपराध है।

भारतीय कानून संहिता धारा 124A में देशद्रोह की दी हुई परिभाषा कहती है कि, कोई भी इंसान सरकार-विरोधी सामग्री बोलता या लिखता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने का प्रयास करता है, तो उसे 3 साल या आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 124A देशद्रोह को एक ऐसे अपराध के रूप में परिभाषित करती है, जिसमें कोई व्यक्ति भारत में  देशद्रोह में वैमनस्य और शत्रुता की सभी भावनाएँ शामिल होती हैं। हालाँकि इस खंड के तहत घृणा या अवमानना फैलाने की कोशिश किये बिना की गई टिप्पणियों को अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता है।

इस मामले को लेकर जब हमने जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रविराज बघेल से बात की तो उन्होंने कहा कि  किसी भी कर्मचारी को देश द्रोही बोलना सरासर ग़लत है एवं जयस इसका विरोध करता है । अगर कोई कर्मचारी अनुपस्थित रहा इसका मतलब ये क़तई नही है की देश द्रोह का मुक़दमा दर्ज हो। आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  से जुड़े कई लोग हैं जो सरकारी नौकरी में होने के बावजूद दफ़्तर में सिर्फ़ हस्ताक्षर करने जाते  तब उनपे कोई कारवाई नहीं होती।सिर्फ गरीब ओर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पर ही कार्यवाही की जाती है।

यह पहली घटना नहीं है जब सरकारी कर्मचारी को हर घर तिरंगा अभियान में लापरवाही करने के कारण सस्पेंड किया गया हो। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्कूल में हर घर तिरंगा अभियान का आयोजन नहीं करने पर एक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान  एसए कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने पाया कि  पडरौना ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय नोनियापट्टी सुबह 8:15 बजे बंद था और छात्र परिसर में घूम रहे थे।

हर घर तिरंगा अभियान 

आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ास तौर पर जनता से 13 -15 अगस्त के बीच झंडा लगाने की अपील की थी. भारत के संस्कृति मंत्रालय ने दूसरे मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर इसके लिए ख़ास व्यवस्था भी की थी तथा इस अभियान को ‘हर घर तिरंगा’ का नाम दिया गया।  इस बार स्वतंत्रता दिवस आजादी का अमृत महोत्सव व हर घर तिरंगा अभियान  पूरे जश्न के साथ मनाया गया।