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राजौरी आतंकी हमला: पीड़ित परिजन ने कहा, “हमें हथियार देने के बजाय पास में चौकी बने”

नए साल के पहले दिन हुए आतंकी हमले में प्रीतम लाल और उनके बेटे शिशुपाल की मौत हो गई। प्रीतम लाल के भाई ग्राम रक्षा समिति के मद्देनजर मिल रहे हथियार के सवाल पर कहते हैं कि, “हम हमेशा अपने साथ हथियार नहीं रख सकते हैं। खेती के समय या आम दिनचर्या में बंदूक लेकर तो नहीं चल सकते।”


By Team Mojo, 17 Jan 2023


साल 2023 के पहले दिन शाम को जम्मू के राजौरी ज़िले के डांगरी गांव में एक आतंकी हमला हुआ। आतंकियों ने 50-50 मीटर की दूरी पर स्थित तीन मकानों पर गोलीबारी की, जिसमें पाँच लोगों की मौत और पाँच घायल हो गए। हमले में प्रीतम लाल (57 वर्ष) एवं उनके बेटे शिशुपाल (32 वर्ष) व सतीश कुमार (45 वर्ष), दीपक कुमार (23 वर्ष) और उनके भाई प्रिंस शर्मा (23 वर्ष) की मौत हो गई, जबकि पवन कुमार (38 वर्ष), सरोज बाला (35 वर्ष), पवन कुमार (32 वर्ष), रोहित पंडित (27 वर्ष) और रिदम शर्मा (17 वर्ष) जख्मी हो गए। अभी गांव इस हमले से उबरा भी नहीं था कि अगले ही दिन सोमवार साढ़े नौ बजे सुबह हमले में मारे गए दीपक कुमार के घर आइईडी विस्फोट हुआ, जिसमें दो नाबालिग बच्चों की मौत और दस अन्य घायल हो गए।

Mojo Story ने जब हमले में मारे गए डांगरी गांव के प्रीतम लाल (57 वर्ष) और शिशुपाल (32 वर्ष) के परिजनों से बातचीत की, तो उन्होंने हमें बताया कि पूरी घटना कैसे हुई। प्रीतम लाल के भाई ने हमें बताया कि आतंकियों ने मेरे भाई से आधार कार्ड दिखाने को कहा और उसकी पहचान करने के बाद उस पर गोली चला दी। इसके बाद आतंकियों ने घर के बाहर खड़े भतीजे को निशाना बनाया। आतंकी इसके बाद दूसरे पीड़ित सतीश कुमार की घर की ओर भाग गए। वे कहते हैं कि आतंकियों ने हिंदुओं की पहचान करके हमला किया। इससे पहले ऐसी कोई घटना यहां नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि गांव के आसपास में हमारी सुरक्षा के लिए कोई पुलिस चौकी या सेना की तैनाती नहीं है। उनका कहना है कि,”राजौरी चौकी से घटनास्थल तक की दूरी एक घंटे की है। पहले पहाड़ी में ऊपर आर्मी की पोस्ट थी, वह भी हटा ली गई।” उनके अनुसार, “आतंकियों के पास ऑटोमैटिक वेपन (स्वचालित हथियार) होते हैं। ग्राम रक्षा समिति की ओर से हमें बंदूकें दी गई हैं, मगर हम उन्हें हमेशा अपने साथ तो नहीं रख सकते। खेत पर जाने और आम दिनचर्या में क्या बंदूक लेकर चल सकते हैं?” वे मानते हैं कि, “यहां पुलिस चौकी या आर्मी पोस्ट बने तो वही हमारी सुरक्षा के लिए बेहतर है।” आगे वे कहते हैं, “हमें खेतीबाड़ी के काम करने होते हैं, लकड़ी चुनकर लानी होती है। ऐसे में हम हमेशा हमारे साथ हथियार नहीं रह सकते। यहां अधिकतर लोग खेतीबाड़ी से ही जुड़े हैं।”

हमले में मारे गए शिशुपाल के छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनकी एक बेटी और एक बेटा है। उनके जीवन सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन एवं सरकार की ओर से क्या मदद मिलती है, यह सवाल अभी भी भविष्य के गर्भ में छिपा है। हालांकि, परिजनों को प्रशासन से आश्वासन मिला है कि हमले में मारे गए प्रीतम लाल के बेटे शिशुपाल की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। वहीं, परिजनों की मांग है कि “प्रीतम लाल की बेटी को भी सरकारी नौकरी दी जाए।” आतंकी हमले में प्रीतम लाल और उनके बेटे शिशुपाल की मौत हो गई थी।

नए वर्ष की शाम हमले में मारे गए दो भाई दीपक कुमार (23 वर्ष) और प्रिंस शर्मा (23 वर्ष) के घर अगले दिन हुए आइईडी विस्फोट में दो नाबालिग बच्चों की मौत हुई। पीड़ितों के साथ घटनास्थल पर मौजूद एक घायल बच्चे कन्हैया शर्मा ने हमें बताया कि, “अचानक धमाका हुआ जिसके बाद मैं वहां से भागा और उस दौरान मेरी बाजू में चोट आ गई। फिर मैं थोड़ी देर दौड़ने के बाद बेहोश हो गया। पीछे से धुआं ही धुआं आ रहा था।” घायल कन्हैया बताता है कि, “घटने के समय मौक़े पर हम कुल आठ लोग मौजूद थे।”

ऐसे में नई साल की शाम आतंकी हमले के बाद अगले ही दिन पीड़ित के घर पर हुआ यह आइईडी विस्फोट कई सवाल खड़ा करता है। क्या इसमें सुरक्षा व्यवस्था की चूक है? अगर नहीं तो, फिर हमले के बाद सुरक्षा चौकसी के बीच मौक़े पर आइईडी कैसी लगाई गई। जांच के दौरान पीड़ित के घर पर लगाया गया यह आइईडी आख़िर सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में क्यों नहीं आया। सवाल ऐसे कई हैं, मगर उनके जवाब मामले में एक गभीर जांच के बाद ही मिल पाएंगे।