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Uttarakhand Sinking: अटाली में महीनों से आ रही दरारें, जोशीमठ के बाद खुली आखें

उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास स्थित अटाली गांव में मकानों, खेतो में दरारें बढ़ते जाने से हलकान लोग। लोगों ने बताया कि यहां रेलवे के लिए टनल निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ज़मीनें धंस गईं। पिछले डेढ़-दो महीनों से घरों में दरारें बढ़ने लगीं।


By Team Mojo, 9 Jan 2023


उत्तराखण्ड में विकास कार्य और प्राकृतिक आपदा के बीच संबंध को लेकर अंतर्द्वंद काफ़ी समय से चला आ रहा है। ऋषिकेश के पास स्थित अटाली गांव आज इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। यहां रेलवे के लिए टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए बाकायदा लोगों से उनकी ज़मीन लेकर उन्हें बदले में मुआवजा दिया गया है। मालूम हो कि यह जगह जोशीमठ से नीचे है और 150 से 200 किलोमीटर दूर है, मगर दरार को लेकर हालात एक जैसे ही हो चले हैं।

अटाली के घरों और खेतों में दरारों के निशान साफ़ तौर पर देखे जा सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज़ से यहां अधिक भूस्खलित ज़मीन को साइन बोर्ड लगाकर घेरा दिया गया है। कई मुख्य मार्ग भूस्खलन के कारण बंद हो गए हैं, जिसके कारण लोग खेतों में वैकल्पिक रास्ता बना कर आ-जा रहे हैं। यहां के लोग खौफ़ में जीने को मजबूर हैं, उन्हें आए दिन जानमाल के खतरे के बीच जीना पड़ रहा है।

लोगों ने बयां किए अपने दर्द, कहा कोई नहीं है सहारा

स्थानीय लोगों की चिंता अब और बढ़ने का कारण यह भी है कि यहां बरसात का मौसम आने वाला है। यह समय वैसे भी पहाड़ी इलाकों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। अब जब भूस्खलन की स्थिति है, ऐसे में बारिश के पानी को सोखने के लिए पर्याप्त मिट्टी नहीं मिलेगी। यह वहां सीढ़ीदार खेती होने से ऊपर बने मकानों के लिए खतरे का काम करेगा। लोग इसको लेकर चिंतित हैं। उन्हें जानमाल का खतरा बना हुआ है।

बावजूद इसके वहां रह रहे लोग इस जगह को छोड़ना नहीं चाहते हैं। हमारे संवाददाता हर्षित शर्मा ने जब यहां के लोगों से बात की तो लोगों ने बताया कि जब से रेलवे के लिए टनल निर्माण शुरू हुआ है, तब से यह दिक्कत आ रही है। धीरे-धीरे मकान में दरारें आते रहीं, पहले एक में फिर दूसरे में। लोगों ने कहा कि उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों की बैठकें होती रहती हैं, मगर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता।

कुआंरी देवी कहती हैं, “जब से टनल का कार्य शुरू हुआ है, तब से यहां खतरा बढ़ गया है। हमारे मकानों में दरारें आने लगी। पहले एक मकान में आया, फिर दूसरे में भी। हमारे गोशाला में भी दरारें आ गई हैं। वे कहती हैं कि फर्श में भी दरारें आ गई हैं। पहले गांव से हटाया गया और अब यहां से हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार से मुआवजा मिले न मिले, हम यहां से जाना नहीं चाहते हैं। हमें यहीं रहना है।”

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि “पहले यहां हमारी खेत थी, फिर यहां टनल का कार्य शुरू हुआ जिसके बाद यह जमीन धंस गई। मकानों में दरारें धीरे-धीरे आई हैं, करीब डेढ़ महीने पहले यह शुरू हुआ।”

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