‘अब ट्रेंड बदल रहा है… चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री आएं या रक्षा मंत्री, आदिवासियों के लिए स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण’

‘अब ट्रेंड बदल रहा है… चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री आएं या रक्षा मंत्री, आदिवासियों के लिए स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण’

राजनीति का सबसे बड़ा फॉर्मूला जो मेरे लिए मायने रखता है, वह है जनता के साथ सीधा आत्मीय संबंध। विधायक के तौर पर जिस तरह से मैंने जनता की सेवा की है, सांसद का चुनाव जीतने के बाद भी लोग मेरे व्यवहार में कोई कमी नहीं पाएंगे।

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीते महीने 28 मई को दुमका के एयरपोर्ट मैदान में लाखों की भीड़ के बीच प्रधानमंत्री मोदी संथाल परगना की तीन लोकसभा सीट दुमका, गोड्डा और राजमहल के भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट की अपील कर रहे थे। तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि दुमका लोकसभा से भाजपा सांसद प्रत्याशी सीता सोरेन के लिए मोदी फैक्टर काम करेगा और वह भारी मतों से जीत दर्ज़ करेंगी। लेकिन, चार जून को लोकसभा चुनाव के परिणाम ने इस गणित को तब चुनौती दे दी जब झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद प्रत्याशी नलिन सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन को पछाड़कर 22,527 मतों से जीत दर्ज़ कर ली। इस दिलचस्प परिणाम के बाद प्रिंस मुखर्जी ने नलिन सोरेन से बात की। पेश हैं उनसे बातचीत के अंश -

दुमका लोकसभा से भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री मोदी और राजनाथ सिंह दुमका आए। बावज़ूद उसके आप जीत गए, क्या लगता है राजनीति का कौन-सा फॉर्मूला आपके लिए काम किया?

दुमका में हमारी जीत के लिए स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण रहे। पहले की भाजपा सरकार (रघुवर सरकार) ने सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन करने का प्रयास किया था, ताकि विकास कार्यों के लिए आदिवासियों की ज़मीन ली जा सके। एक्ट में संशोधन की मंशा के ख़िलाफ़ जनता ने हमें वोट किया है। अगर एक्ट में संशोधन हो जाता तो जब चाहे तब आदिवासियों की ज़मीन खरीद-बिक्री की जा सकती थी। यहां चाहे प्रधानमंत्री आएं या रक्षा मंत्री, संथाल परगना के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकते हैं। यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है।

इन सबके बीच राजनीति का सबसे बड़ा फॉर्मूला जो मेरे लिए मायने रखता है, वह है जनता के साथ सीधा आत्मीय संबंध। संथाल परगना की जनता स्थानीय मुद्दों में यक़ीन रखती है। अब ट्रेंड बदल रहा है; लोकसभा चुनाव भले राष्ट्रीय मुद्दे पर जीते जाते हैं, लेकिन संथाल परगना में स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों पर हावी रहते हैं।


जीत के बाद अपने आवास पर बातचीत के दौरान नलिन सोरेन •

अब जब आप सांसद बन गए हैं, क्या आपसे पहले की तरह ही आम लोग सहजता से मिल पाएंगे या अब यह थोड़ा जटिल हो जाएगा?

मुझमें जो गुण है, वह बरकरार रहेगा। विधायक के तौर पर जिस तरह से मैंने जनता की सेवा की है, सांसद का चुनाव जीतने के बाद भी लोग मेरे व्यवहार में कोई कमी नहीं पाएंगे। बल्कि, और भी बेहतर ढंग से मैं जनता की सेवा कर पाऊंगा।

दानीनाथ मंदिर के पास मेरा आवास है। दुमका की जनता से आप पूछ सकते हैं कि कैसे एक आम इंसान की तरह मैं अपने आवास के बाहर सुबह-शाम बैठता था और लोग न केवल आकर मुझसे मिलते थे, बल्कि मैं स्वयं उनका हाल-समाचार लिया करता। मुझसे दुमका की जनता की जो उम्मीदें हैं, उनको तोड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता है।

असली नेता वही है जिनके दरवाज़े आमजनों के लिए खुले रहें, क्योंकि लोकतंत्र में जनता ने ही नेता को बनाया है; ऐसे में जनता सर्वोपरि है, जनता है तभी हम हैं। मैं भरोसा दिलाता हूं कि नलिन सोरेन उसी रूप में यहां की जनता से रूबरू होगा जिस रुप में वह अब तक होता आया है।

शिकारीपारा विधानसभा से आप सात बार विधायक रह चुके हैं। विधानसभा क्षेत्र का दायरा लोकसभा के मुक़ाबले छोटा था। अब जब आपने दुमका लोकसभा से चुनाव जीत लिया है, तो आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?

स्थानीय बेरोज़गार युवकों को रोज़गार दिलाने का प्रयास करूंगा। बेरोज़गारी तो पूरे देश में ही चरम पर है, दुमका की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं है। युवाओं ने भी मुझ पर उम्मीद जताया है; कड़ी मेहनत से वे प्रतियोगिता की तैयारी करते हैं, उन्हें अच्छी नौकरी मिले यह बेहद ज़रूरी है। स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि पांच वर्ष बाद वे ठगा-सा महसूस न करें। दुमका से मैं भलीभांति परिचित हूं, इसलिए यहां की समस्याएं भी जानता हूं। जब एक नेता अपने इलाके की समस्याओं को महसूस करने लगे तो समझ लें कि समाधान निश्चित है।

यहां की सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान रहेगा। किसानों के लिए खेती सबसे बड़ी पूंजी है और अगर यही पूंजी उनके लिए परेशानी का सबब बन जाए तो एक नेता का काम होता है कि वह उसके लिए बेहतर समाधान तलाशे। मैं उनके लिए समाधान तलाशने का काम करूंगा। फसलों को बढ़ने में बढ़िया बीज की जितनी भूमिका होती है, उतनी ही भूमिका सही सिंचाई की होती है। फसलों के लिए सिंचाई बेहद महत्वपूर्ण है। उम्दा सिंचाई से फसलों को पोषण मिलता है। सिंचाई बढ़िया होगी तो फसल भी अच्छी होगी और उससे किसानों को मुनाफ़ा होगा। इसलिए मैं फिर कहता हूं कि बेरोज़गारी और सिंचाई पर मेरा विशेष ध्यान रहेगा।


दुमका, जहां गरीबी, पलायन, बिजली संकट, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि समस्याएं चरम पर हैं, उनको लेकर आपकी क्या योजना होगी?

जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि मैं दुमका को अच्छी तरह से जानता हूं, यहां की एक-एक गलियों से परिचित हूं। चाहे ग्रामीण क्षेत्र हो या शहरी, सभी जगहों की समस्याओं पर मेरी पैनी नज़र रहती है। पलायन की समस्या के रोकथाम के लिए ज़ाहिर तौर पर बेहतर कदम उठाने पड़ेंगे। दिल्ली से वापस आने दें, फिर कार्य योजना के ज़रिये यह सब मुमकिन है।

आपने ग़रीबी का मुद्दा उठाया; जब हर हाथ में रोज़गार होगा तो वह आप ही दूर होगी। सरकारी राशन की डिलीवरी अच्छे से हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा। सुदूर क्षेत्रों में योजनाओं का क्रियान्यवयन बेहतर तरीक़े से हो; उस पर काम किया जाएगा। जहां तक बिजली संकट की बात है; उसके लिए किस तरह से हम सोलर पर शिफ्ट हो सकें, उस पर ज़ोर होगा। साथ ही दुमकावासियों को अच्छी बिजली मिले, यह तो सुनिश्चित करूंगा ही।

स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त हो, उसके लिए अच्छी मॉनिटरिंग चाहिए। स्वास्थ्य संबंधित योजनाएं किस तरह से ज़िले में काम कर रही हैं, उसकी समीक्षा की जाएगी। अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। शिक्षा बेहतर हो, उसके लिए तो झारखंड सरकार हमेशा से प्रयासरत रही है। अब जब मैं सांसद बना हूं तो निश्चित रूप से हमारी प्राथमिकताओं में शिक्षा रहेगा।


चुनाव जीतने के बाद लोगों का अभिवादन स्वीकारते नलिन सोरेन •

दुमका रेलवे स्टेशन पर कोल डंपिंग एक बड़ा मसला बन गया है। कुरुआ में भी कोल डंपिंग का काम जारी है। स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन करके डंपिंग यार्ड को हटाने की मांग की। अब आप सांसद का चुनाव जीत चुके हैं तो कोल डंपिंग यार्ड को लेकर आपकी क्या रणनीति होगी?

यह जानकारी मुझे है कि कोल डंपिंग यार्ड से रसिकपुर के लोगों को समस्याएं हो रही हैं। कुरुआ का आपने ज़िक्र किया, वह भी सज्ञान में है। जैसा कि मैंने आपको कहा की दिल्ली से लौटने दें, फिर जनता के साथ बैठकर बात करेंगे। उनकी समस्याओं को समझने का काम किया जाएगा। चूंकि झारखंड में कोयला का काफ़ी अधिक उत्पादन होता है, इसलिए ऐसी दिक़्क़तें कई दफ़ा सुनने को मिलती हैं। जब तक जनता के पास बैठकर समस्याओं को समझा नहीं जाएगा, तब तक कोई रास्ता कैसे निकलेगा?

झारखंड कोयला का भंडार है जोकि गर्व का भी विषय है, लेकिन जब यह आम जनता के लिए परेशानी बन जाए तो बात-विचार और बेहतर संचार ज़रूरी है। मैं अवश्य आम जनता के साथ संवाद करूंगा। जनता ने जब अपने मत का प्रयोग करते हुए सांसद के तौर पर मुझ पर भरोसा जताया है, तो यक़ीन मानें कि मैं जनता का पसंदीदा विधायक रहा हूं और अब वैसे ही सांसद बनकर उनकी सेवा में तत्पर रहूंगा। उसमें किसी तरह का कोई किंतु-परन्तु नहीं है।

क्या सीता सोरेन की अब घर वापसी हो सकती है?

सीता सोरेन के मन में जो होगा, वह करेंगी। वैसे, यह संगठन पर निर्भर करता है। यदि संगठन ने सीता सोरेन को स्वीकार किया तो वह आ सकती हैं। इसलिए इस पर मैं कोई विशेष टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।

क्या राम मंदिर और हिंदुत्व के सहारे अब चुनाव जीतना कठिन दिखाई पड़ रहा है?

यह आस्था का प्रश्न है, इसका निर्णय मतदाताओं पर छोड़ना चाहिए। प्रजातंत्र में वोट का बहुत महत्व है। वैसे, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद (अयोध्या) की सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार लल्लू सिंह 50 हज़ार मतों से हार गए। एक राजनेता को आम लोगों के जीवन से जुड़े मुद्दों पर काम करना चाहिए और वही उसका सबसे बड़ा धर्म है।

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